जहां पहले घर के बाहर के कामों में पुरुषों का ही अधिपत्य था वहीं अब आज के मॉडर्न जमाने में महिलाएं भी घर से बाहर निकल कर अनेक प्रकार के काम कर रही हैं परंतु बाहर के काम करते समय महिलाओं को कई प्रकार की समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। जब एक स्त्री अथवा युवती घर से बाहर निकल कर काम करती है तो उसे काम की जगह पर और यहां तक कि रास्ते में भी आते जाते समय कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है और उन्हीं में से एक मुख्य समस्या है सेक्सुअल हरासमेंट, जिसे हिंदी में यौन उत्पीड़न कहा जाता है।

आज हम भले ही 21वीं सदी में जी रहे हो परंतु आज भी कुछ लोगों की सोच बहुत पुरानी है। कुछ लोग यही सोचते हैं कि महिलाओं को बाहर के काम नहीं करना चाहिए बल्कि महिलाएं सिर्फ घर चलाने के लिए और बच्चे पैदा करने के लिए ही बनी है परंतु आज के मॉडर्न युग में सब संभव है। इसलिए आज कई महिलाएं घर से बाहर निकल कर भी काम कर रही हैं परंतु कई बार काम की जगह पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न होता है और महिलाएं लोक लाज के डर के कारण अपनी समस्या को किसी को बता नहीं पाती है परंतु पिछले कुछ सालों में अपने साथ घटित होने वाली सेक्सुअल हैरेसमेंट की घटनाओं को बताने के लिए मी टू नाम का आंदोलन काफी चर्चा में आया है।

अगर आप नहीं जानते कि मी टू आंदोलन क्या है तो चिंता करने की कोई बात नहीं है क्योंकि आज के इस आर्टिकल में हम आपको मी टू आंदोलन क्या है? मी टू आंदोलन किसने चालू किया? मी टू आंदोलन के भुक्तभोगी? मी टू आंदोलन के फायदे और नुकसान तथा इस आंदोलन से जुड़ी सभी जानकारी देने वाले हैं, चलिए चलते हैं मुख्य मुद्दे पर।

मी टू का मतलब

अगर हम मी टू के हिंदी में अर्थ के बारे में बात करें तो इसका मतलब होता है "मेरे साथ" या "मैं भी"। पिछले कुछ सालों में अनेकों महिलाओं ने अपने साथ होने वाली यौन शोषण की घटनाओं को उजागर करने के लिए सोशल मीडिया पर इस हैशटैग का इस्तेमाल किया है। महिलाएं इस हैशटैग का इस्तेमाल करके सोशल मीडिया पर उनके साथ वर्तमान में अथवा पूर्व में घटित यौन शोषण की घटनाओं को उजागर कर रही है।
जिन महिलाओं ने इस अभियान में भाग लेकर अपने साथ घटित घटनाओं के बारे में दुनिया के सामने अपनी बात रखी है, उन्हें पूरी दुनिया से काफी समर्थन भी प्राप्त हो रहा है तथा उनके आरोपों के बाद आरोपी लोगों की गिरफ्तारी भी हो रही है और उन्हें आरोप साबित होने पर सजा भी दी जा रही है।

मी टू मुवमेंट क्या है

मी टू एक ऐसा आंदोलन है जो मुख्य रूप से महिलाओं पर केंद्रित है। मी टू आंदोलन के द्वारा दुनिया भर की महिलाओं ने उनके साथ हुए अत्याचारों को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक किया है और अपना दर्द बयां किया है।

पूरी दुनिया में रोजाना कई महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा तथा काम की जगह पर यौन शोषण होता है परंतु महिलाएं इसका विरोध नहीं कर पाती हैं। वह यही सोचती है कि अगर उन्होंने किसी को भी उनके साथ घटित होने वाली घटनाओं के बारे में बताया तो लोग उन्हें ही इसका दोषी मानेंगे। इसके अलावा महिलाओं को यह भी डर रहता है कि उनके साथ घटित होने वाले गंदे कामों के बारे में अगर कोई जान जाएगा तो उनके साथ उनके परिवार की भी बदनामी होगी और उनका कैरियर खराब हो जाएगा।

परंतु मी टू आंदोलन के जरिए अब ऐसी महिलाएं खुलकर सामने आ रही हैं और अपनी बात रख रही हैं जिनके साथ कई सालों पहले या वर्तमान में यौन शोषण की घटनाएं हो रही हैं। इस आंदोलन के द्वारा पूरी दुनिया से ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं जिनमें महिलाओं का शोषण करने वाले उनका करीबी रिश्तेदार, उनका बॉस या उनके अंकल ही निकले हैं।इस आंदोलन के द्वारा सबसे ज्यादा ऐसी महिलाओं की कहानी सामने आ रही है जिनका वर्कप्लेस पर यौन शोषण किया गया था।

मी टू आंदोलन की शुरुआत

अगर हम इस आंदोलन के शुरुआत के बारे में बात करें तो मी टू आंदोलन की शुरुआत साल 2006 में हॉलीवुड से हुई थी।मी टू आंदोलन की शुरुआत अमेरिका की एक सिविल राइट्स एक्टिविस्ट ने की थी जिनका नाम "तराना वर्क" है परंतु साल 2017 के अक्टूबर महीने में मी टू काफी फेमस हुआ कयोंकि अमेरिकन अभिनेत्री "अलीशा मिलानो" ने ट्विटर पर एक ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने ऐसी महिलाओं को मी टू हैशटैग प्रयोग करने की सलाह दी थी जिनके साथ यौन शोषण की घटनाएं हुई थी और इसी के बाद से ऐसी कई महिलाएं सामने आई जिन्होंने अपने साथ हुई सेक्सुअल हैरेसमेंट की घटनाओं को दुनिया के सामने खुल कर रखा।

साल 2017 के अक्टूबर महीने में मी टू आंदोलन ने हॉलीवुड में काफी जोर पकड़ा और हॉलीवुड के सबसे बड़े प्रड्यूसर "हार्वी  विस्टीन" के खिलाफ 20 से अधिक अभिनेत्रियों ने यौन शोषण के आरोप लगाए।
इन सभी अभिनेत्रियों ने अपने बयान में कहा था कि जब उन्होंने “हार्वी  विस्टीन" के साथ काम किया था तब उसने उन सभी के साथ उत्पीड़न किया था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री "एंजेलिना जोली" और "जीनीश पेट्रोन" ने भी वाइन्सटीन पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे। इस केस के बाद हॉलीवुड में यौन उत्पीड़न से संबंधित अन्य केस भी सामने आए जिसमें केविन स्पेसी जैसे एक्टर का नाम भी शामिल था।

दुनिया के प्रसिद्ध मी टू केस

डोनाल्ड ट्रंप

इस केस के सबसे बड़े आरोपी में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम भी सामने आया। डोनाल्ड ट्रंप पर जेसिका, लीड्स, समांथा हलवे और रैकल कुमस नाम की तीन महिलाओं ने यौन शोषण के आरोप लगाए। आरोप लगने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन सभी आरोपों को नकार दिया था।

हार्वी वीनस्टीन

यह हॉलीवुड के एक बड़े प्रोड्यूजर है जिन पर 20 से अधिक महिलाओं ने यौन शोषण का आरोप लगाया है। आपको बता दें कि हॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री एंजेलिना जोली और जीनीश पेट्रोन ने भी इन पर यौन शोषण का आरोप लगाया था और अदालत ने इन्हें इस मामले में दोषी पाया था और यदि इन पर आरोप साबित हो जाता है तो इन्हें अमेरिकन कानून के अनुसार 25 साल की सजा हो सकती है तथा इन्हें जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।

जस्टिन बीबर

साल 2017 में 2 महिलाओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से जस्टिन बीबर पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। हालांकि आरोप लगने के बाद जस्टिन बीबर ने अपनी तरफ से कार्रवाई करते हुए उन दोनों महिलाओं पर एक एक करोड़ का मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जस्टिन बीबर हॉलीवुड के प्रसिद्ध पॉप सिंगर है, जो पूरी दुनिया में काफी प्रसिद्ध है।

क्रिस डेलिया

यह हॉलीवुड के प्रसिद्ध कॉमेडियन और अभिनेता है।इन पर कई महिलाओं ने सेक्सुअल हैरेसमेंट के आरोप लगाए थे। महिलाओं ने कहा था कि क्रिश डेलिया ने जब वह 16 साल के थे, तब उनके साथ यौन शोषण किया था। महिलाओं ने अपने आरोप में कहा था कि क्रिश डेलिया ने उन्हें गंदे मैसेज भेजे थे और उनकी गंदी फोटो ली थी

स्कॉट कुग्गेलैन

यह न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम के खिलाड़ी है। इन पर साल 2015 में एक महिला ने बलात्कार का आरोप लगाया था। हालांकि साल 2017 में कोर्ट ने इन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया था परंतु यौन शोषण में इनका नाम आने पर इन्हें कई जगह विरोध का सामना करना पड़ा था।

इंडिया में मी टू केस

एमजे अकबर

यह भारत के विदेश राज्य मंत्री और पूर्व पत्रकार रह चुके हैं।इन पर कई महिलाओं ने यौन शोषण का आरोप लगाया है। आरोप लगाने वाली महिलाओं में प्रिया रामानी और तुषिता मेहता जैसी पत्रकार भी शामिल है। इसके अलावा अन्य 20 महिलाओं ने भी एमजे अकबर पर यौन शोषण का आरोप लगाया है।एमजे अकबर को साल 2016 में 5 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ने कैबिनेट मंत्री नियुक्त किया था।

बॉलीवुड गायक अभिजीत भट्टाचार्य  

अभिजीत भट्टाचार्य बॉलीवुड के जाने-माने सिंगर है। इन्होंने कई भाषाओं में गाना गाया है। मी टू केस से अभिजीत भट्टाचार्य भी अछूते नहीं रहे। इन पर एक फ्लाइट अटेंडेंट ने यौन शोषण का आरोप लगाया था, हालांकि अभिजीत भट्टाचार्य ने इन सभी आरोपों को एक सिरे से खारिज कर दिया था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अभिजीत भट्टाचार्य ने हिंदी भाषा के अलावा अन्य कई भाषाओं में गाना गाया है और इन्हें पद्म पुरस्कार भी प्राप्त है।

विवेक अग्निहोत्री

विवेक अग्निहोत्री बॉलीवुड के जाने माने अभिनेता है।इन पर बॉलीवुड की हीरोइन तनुश्री दत्ता ने यौन शोषण का आरोप लगाया है। तनुश्री ने कहा कि साल 2005 में जब वह "चॉकलेट" फिल्म की शूटिंग कर रही थी, तब विवेक अग्निहोत्री ने उनके साथ सेक्सुअल हरासमेंट करने की कोशिश की।

चेतन भगत

चेतन भगत भारत के प्रसिद्ध लेखक हैं। इन पर भी एक महिला ने यौन शोषण का आरोप लगाया था और बातचीत की रिकॉर्डिंग के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर शेयर किए थे।
यह मामला सामने आने के बाद चेतन भगत ने उस महिला से माफी मांगी थी। इसके साथ ही साथ उन्होंने अपनी पत्नी अनुषा से भी माफी मांगी थी।

साजिद खान

साजिद खान बॉलीवुड के प्रसिद्ध फिल्म मेकर है।इन पर जनरलिस्ट करिश्मा उपाध्याय, अभिनेत्री सलोनी चोपड़ा और रचेल वाइट ने यौन शोषण का आरोप लगाया था।इन तीनों महिलाओं ने साजिद खान पर सेक्सुअल हरासमेंट के साथ-साथ मेंटली हरासमेंट का आरोप भी लगाया था तथा यह आरोप लगने के बाद साजिद खान ने फिल्म "हाउसफुल 4" को छोड़ दिया था।

आलोक नाथ

आलोक नाथ बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता है। इन्होंने कई फिल्मों में काम किया है।यह 1980 से ही बॉलीवुड में सक्रिय हैं। इन्होंने फिल्मों के अलावा कई सीरियलों में भी काम किया है।आलोक नाथ पर राइटर और प्रोड्यूसर विनता नंदा ने रेप का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि आलोक नाथ ने उन्हें पहले खूब शराब पिलाई और बाद में उनके साथ गलत काम किया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह मामला 19 साल पुराना है और फिलहाल यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है।

गौरांग दोषी

गौरांग दोषी बॉलीवुड के जाने-माने प्रडूसर है। इन पर अभिनेत्री फ्लोरा सैनी ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। फ्लोरा सैनी ने एक फेसबुक पोस्ट के माध्यम से बताया कि साल 2007 में गौरांग दोषी ने उनके साथ गलत हरकत की थी। इसके अलावा उनके साथ मारपीट भी की थी।

नाना पाटेकर

नाना पाटेकर बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता है। यह काफी सालों से बॉलीवुड में सक्रिय है। अभिनेता होने के साथ-साथ नाना पाटेकर सामाजिक कार्यकर्ता भी है। इन पर बॉलीवुड की अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। तनुश्री ने बताया कि 10 साल पहले जब वह फिल्म "होर्न ओके प्लीज" की शूटिंग कर रही थी, तब उनके साथ नाना पाटेकर ने गलत हरकत की थी।

विकास बहल

विकास बहल बॉलीवुड के डायरेक्टर हैं। फिल्म क्वीन को इन्होंने ही डायरेक्ट किया था।इन पर एक महिला कर्मचारी ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। आरोप लगाने वाली महिला ने कहा था कि वह विकास की शिकायत करने अनुराग कश्यप के पास गई थी परंतु उन्होंने उस पर कोई कार्यवाही नहीं की।

कैलाश खेर

बॉलीवुड के प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर पर महिला गायक सोना महापात्रा ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कैलाश खेर ने बहुत से हिंदी गानों को अपनी आवाज दी है।

अनु मलिक

अनु मलिक बॉलीवुड के प्रसिद्ध म्यूजिक कंपोजर है। इसके अलावा इन्होंने कुछ फिल्मों में गाने भी गाए हैं। अनु मलिक पर भी गायिका सोना महापात्रा ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। सोना महापात्रा ने अनु मलिक को सीरियल प्रिडेटर कहा था जिसका अर्थ होता है लगातार अपराध करने वाला।

सुभाष कुमार

सुभाष कुमार बॉलीवुड के जाने-माने डायरेक्टर है। इन्होंने जौली एलएलबी जैसी फिल्में डायरेक्ट की है।इन पर भी यौन शोषण का आरोप लग चुका है।इन पर अभिनेत्री गीतिका त्यागी ने यौन शोषण का आरोप लगाया था।

मी टू मूवमेंट के फायदे

इस आंदोलन का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि इस आंदोलन के जरिए महिलाओं में अपने साथ हुई घटना को उजागर करने का साहस आया है।इस कैंपेन के जरिए महिलाओं के अंदर ताकतवर लोग, पॉलिटिशन और ऑफिस में काम करने वाले लोगों के खिलाफ बिना किसी डर के बोलने की हिम्मत आई।इस आंदोलन के जरिए ऐसे लोग बेनकाब हुए जो शराफत का चोला पहन कर बैठे थे और जिनकी दुनिया में काफी इज्जत थी। इसके अलावा इस कैंपेन के सामने आने के बाद अब यह माना जा रहा है कि कोई भी पुरुष किसी महिला का यौन शोषण करने से पहले सौ बार विचार करेगा।

मी टू मूवमेंट के नुकसान

जैसे हर चीज के फायदे होते हैं, वैसे ही उसके नुकसान भी होते हैं। अगर हम इस आंदोलन के नुकसान के बारे में बात करें तो इस आंदोलन के द्वारा किसी भी प्रतिष्ठित अथवा आम व्यक्ति को निजी कारणों के कारण बदनाम किया जा सकता है। इसके अलावा जो महिलाएं किसी व्यक्ति पर मी टू के तहत आरोप लगाती हैं और अगर वह आरोप कोर्ट में साबित नहीं होता है तो वैसी महिलाओं को मानहानि का मुकदमा झेलना पड़ सकता है। इसके अलावा इसका सबसे बड़ा नुकसान यह भी है कि जिस व्यक्ति पर भी यह आरोप लगेगा और उस पर केस चलेगा वैसे व्यक्ति को सरकारी नौकरी पाने में दिक्कत हो सकती है।



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